अदरक औषिधीय गुणों से भरपूर

अदरक औषिधीय गुणों से भरपूर

पारम्परिक चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद में अदरक का उपयोग औषिधि के रूप में प्राचीन काल से होता आ रहा है। आयुर्वेद में अदरक को महाऔषिधि कहा जाता है। इसका वनस्पति नाम जिंजिवर ओफिसिनेल है। यह उर्वरा तथा रेत मिश्रित भूमि में पैदा होने वाली गुल्म जाति की वनस्पति का कंद है। अदरक को अंग्रेजी मे ‘जिंजर (Ginger ) कहते हैं। भूमि के अंदर उगने वाला कंद जिसे अदरक कहते हैं। भूमि के अंदर उगने वाला कंद जिसे अदरक कहते हैं प्रयोग मे लाया जाता है। यह आर्द अवस्था मे अदरक व सूखी अवस्था में सोंठ कहलाता है। इसके पत्ते बांस के पत्तों से मिलते -जुलते तथा एक या डेढ़ फीट ऊँचे लगते हैं।
आयुर्वेद मे अदरक का सेवन अपच , गैस दूर करने , पेट दर्द , सूजन दूर करने , पेशाब की मात्रा बढ़ाने , हाजमा ठीक करने , पेट के कीड़े और खांसी आदि के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। अदरक के तीनो को जो कि जमीन के अंदर होते है। उपयोग में लाया जाता है।
ताज़ी अदरक में ८०.९ प्रतिशत जल २.३ प्रतिशत प्रोटीन , ०. ९ प्रतिशत वसा , २.४ प्रतिशत रेशे और १२.३ प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। इसके अतिरिक्त इसमें आयरन कैल्शियम लौह फॉस्फेट आयोडीन क्लोरीन खनिज लवण तथा विटामिन भी पर्याप्त मात्रा में होता है।
सूखी अदरक को सोंठ कहा जाता है। इसमें ९ से १० प्रतिशत जल , १५ प्रतिशत प्रोटीन , ३ से ६ वसा , ३ से ८ प्रतिशत रेशे , ६० से ७० प्रतिशत शर्करा तथा उड़नशील तेल १ से ३ प्रतिशत होते है। अदरक में अनेक अन्य रसायन होते है जिनमें जिंजर आयल मुख्य होते है साथ ही अदरक की विशिष्ट महक विभिन्न वाष्पशील तेलों जिसमें आलियोरेसिन मुख्य होता है।

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