औषिधीय गुणों से भरपूर : केला

औषिधीय गुणों से भरपूर : केला

केले का पौधा देखने में जितना लुभावना होता है फल खाने मेँ उतना ही पोषणयुक्त और स्वादिष्ट होता है। केला पौष्टिक , ठंडा , कामोद्दीपक तथा क्षुधा व कांतिवर्धक है। केला वास्तव में ‘ सम्पूर्ण ‘ आहार है।
केले को संस्कृत में भानुफल कदलीफल व वनलक्ष्मी , बंगला में केलि , तमिल में वाले अरंबई, तेलगु में अन्ति व कदली कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम ‘ मूसा सेपिन्गटम ‘ है। केले की २५० से भी अधिक प्रजातियां हैं।
विश्व भर में लोकप्रिय और पोषक तत्वों से भरपूर केला उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों का फल है। भारत मे केले का उपयोग प्राचीन काल से होता आ रहा है। ईसा से ५००-६०० वर्ष पूर्व बौद्ध ग्रंथोँ में भारत मेँ केले के उत्पादन का वर्णन मिलता है।
भारत में केरल में सर्वाधिक क्षेत्र मेँ केले की खेती की जाती है परन्तु इकाई उत्पादन की दृष्टि से महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं गुजरात राज्य प्रमुख हैं। इसके आलावा असम, उड़ीसा , पश्चिम बंगाल आदि भी केला उत्पादक राज्य हैं।
पका केला पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण स्रोत्र है। केले में कार्बोहाइड्रेट , कैल्शियम तथा लोहा पर्याप्त मात्रा मेँ होता है। पके केले में कार्बोहाइड्रेट २२.२ प्रतिशत , प्रोटीन १.१ प्रतिशत , वसा ०.२ प्रतिशत , पानी ७५. ५ प्रतिशत तथा अन्य तत्व एक प्रतिशत होते है। एक केले में ४०० मिलीग्राम पोटैशियम जाता है।
ह्रदय रोगों संबंधी नवीनतम शोध के अनुसार पोटेशियम युक्त फलों से सेवन से दिल के दौरे की संभावनाएं ३० प्रतिशत कम हो जाती है। केले में एक ऐसा पदार्थ होता है जो मस्तिष्क को सेरोटोनिन बनाने के लिए प्रेरित करता है जिससे थका हुआ मन व तन प्रफुल्लित हो जाता है। केला खिलाडियों और मेहनतकश व्यक्तियों के लिए सर्वाधिक उपयोगी माना जाता है। क्योंकि खेल अथवा अधिक श्रम के दौरान क्षतिग्रस्त इलेक्ट्रोलाइट्स केला सेवन से पुर्नस्थापित हो जाता है। इसके नियमित सेवन से मांसपेशियों में ऐंठन भी नहीं होती है।
केले मेँ बहुत सारे औषिधीय गुण होते है। पका केला मस्तिष्क को बल प्रदान करता है। फायदेमंद होता है। सुखी खांसी व गले की खुश्की मेँ यह फायदेमंद होता है। केले में लौह तत्व व विटामिन ए , बी , और सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते केले के सेवन से पौरुष शक्ति बढ़ती है। भोजन करने के बाद केला खाने से भोजन शीघ्र पचता है।
केले के छिलके के अंदर वाला मुलायम रेशा कब्ज को दूर करके आँतों को ठीक रखता है। नियमित रूप से केले का सेवन करने से कमजोर व्यक्तियों की पाचन शक्ति ठीक होती है। सुबह नाश्ते में केला खाकर दूध पीना एक संतुलित आहार है। कच्चे केले को भुनकर, तलकर और सब्जी के रूप मेँ भी खाया जाता है। आलू की तरह केले के चिप्स भी बनते है दक्षिण भारत में पके केलों से मिठाइयां भी बनायीं जाती है।
भारत में कुछ स्थानों पर केले के पत्ते पत्तल के रूप मेँ उपयोग मेँ लाये जाते है। केले के पौधे और पत्तियों को मांगलिक अवसरों, उत्सवों एवं समारोहों में सजावट के रूप मेँ काम लाया जाता है। केले के रैशे का उपयोग कपडा , बोरे , कागज , रस्सी आदि बनाने मेँ भी किया जाता है।
केले के औषिधीयगुण :-
० नियमित रूप से केले का सेवन करने से पाचन शक्ति ठीक रहती है , भूख में वृद्धि होती है व रंग साफ़ होता है।
० प्रातः नाश्ते में केले का सेवन रामबाण दवा का काम करता है। दिन में खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
० केले के नियमित सेवन से अनिद्रा , कब्ज पेशाब की जलन आदि रोग मिट जाते हैं।
० एनीमिया (रक्त ) की कमी, पथरी , मुहांसे, दन्त रोग व चर्म रोगों मेँ केले का सेवन फायदेमंद रहता है।
० केला संग्रहणी , पुराने दस्तों एवं पेचिश रोग मे लाभदायक है।
० कच्चा केला पेप्टिक अल्सर में भी उपयोगी पाया गया है।
० आयुर्वेद में केले के पिंड का रस क्षय रोग में प्रभावी औषिधि के रूप मेँ उपयोग किया जाता है।
० यद्यपि केला मधुमेह मेँ निषिद्ध है लेकिन केले के पिंड का रस मधुमेह मेँ बहुत उपयोगी पाया गया है।
० नियमित रूप से केला खाने से कब्ज , अग्निमांध , आफरा और खाने में अरुचि का भाव दूर होता है।
० रोजाना दोपहर मे भोजन के पश्चात् केले का सेवन करने से रंग साफ होगा , बाल लम्बे होंगे तथा बालों से सम्बंधित समस्यांएं भी दूर होंगी।
० सांवली रंगत को निखारने और चेहरे की झुर्रिया दूर करने के लिए केले के रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर चेहरे , गर्दन, हाथ व पैरों पर लगाना चाहिए तथा सूखने पर धो लेना चहिये।
सावधनियां :-
० रत में केले का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे जोड़ों में दर्द व खांसी की शिकायत होती है।
० बुखार व मधुमेह में भी केले का सेवन नहीं करना चाहिए।
० केला प्रातः कल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे ठण्ड की शिकायत हो सकती है।

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