कलोंजी

कलोंजी

कलोंजी
हर मर्ज़ की रामबाण दवा

कलोंजी जिसे लोग मंगरैल तथा कला जीरा के नाम से भी जानते है, अति प्रसिद्ध वनस्पति हैं। इसका उपयोग ओषधि, सौंदर्य प्रसाधन , मसाले तथा खुशबु के लिए पकवाने में किया जाता है। सदियों से कलोंजी का प्रयोग अनेक रोगो के निवारण के लिए भी किया जाता हैं।
कलौंजी का स्वाद हल्का कड़वा व तीखा और गंध तेज होती है। यहाँ गुण में लघु, रुक्ष, तथा वियाक में कटु है। कलौंजी वीर्य में उष्ण है, यह कफ-वात शामक किन्तु पित्तवर्धक हैं। चर्मरोग में इसके बीजो का लेप किया जाता है।
कलौंजी का प्रयोग मुख दुर्गंध, अरुचि, अग्निमांध, अजीर्ण, उदारथुल, अतिसार, ग्रहणी, कृमिरोग, खांसी, दमा, सर्दी, जुकाम आदि रोगो में किया जाता हैं। इसके सेवन से गर्भाशय का शोधन होता है, दूध बढ़ता है और स्वास्थ्य की रक्षा होती है। मूत्राघात में इसका प्रयोग करने से मूत्रवृद्धि होती है और मूत्राघात रोग दूर होता हैं।

हज़रात मोहम्मद कलौंजी को मौत के सिवाय हर मर्ज़ की दवा बताते थे। एविसिया ने अपनी किताब ‘केतन आयु मेडिसिन’ में लिखा है की कलौंजी शरीर को ताकत से भर देती है, कमज़ोरी व थकन दूर करती हैं तथा पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, प्रजनन तंत्र की बिमारियों का इलाज करती हैं।

अनेको रोगो में कलौंजी का प्रयोग
१. कैंसर- कैंसर के रोगो कलौंजी का तेल ५ ग्राम की मात्रा में एक ग्लास अंगूर के रास में मिलकर दिन में तीन बार पिए। लहसुन भी खूब खाय। २ किलो गेहू और १ किलो जौ के मिश्रित आटे की रोटी ४० दिन तक खिलाय। आलू, अरबी, बैगन से परहेज़ करे।

२. दमा व खासी- छाती व पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करे। तीन बड़ी चम्मच तेल रोज़ पिए और पानी में तेल डालकर उसका भाप लें।

३. स्मरणशक्ति- ५ ग्राम तेल १०० ग्राम उपले हुए पुदीना के साथ सेवन करे।

४. डायबिटी- एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपापड़ा को पीस कर चूर्ण बनाले। इसे २ ग्राम की मात्रा में ५ ग्राम कलौंजी के तेल के साथ रोज़ नाश्ते से पहले एक माह तक लें।

५. गुर्दे और मूत्रशय की पथरी- २५० ग्राम कलौंजी को महीन पीस कर २५० ग्राम शहद में अच्छी तरह मिलाकर रख लें। इसे दो बड़े चम्मच लेकर एक कप गर्म पानी में एक छोटा चम्मच तेल के साथ अच्छी तरह मिलाकर प्रतिदिन नाश्ते के पहले पिए।

६. ह्रदय रोग- जब भी कोई गर्म पिय ले, उसमे एक चम्मच मिलाकर ले। रोज़ सुबह लहसुन के दो कालिया नाश्ते के पहले ले और तीन दिन में एक बार पुरे शरीर की तक की मालिश करके आधे घंटे धुप का सेवन करे, यहाँ उपचार एक महीना तक करे। इससे ह्रदय रोग में आराम मिलेगा।

७. सफ़ेद दाग- १५ दिन तक रोज़ पहले सेब का सिरका मेल, फिर कलौंजी का तेल मेल, सफ़ेद दाग दूर होगा।

८. आर्थराइटिस- कलौंजी का तेल हल्का गर्म गरके जहा दर्द हो वह मालिश करे और एक बड़े चम्मच तेल को दिन में तीन बार पिए, १५ दिनों में जोड़ो के दर्द एवं अर्थराइटिस से छुटकारा मिल जायेगा।

९. सिरदर्द- माथे और सिर के दोनो तरफ कनपट्टी के आस-पास कलौंजी का तेल एक कप दूध में मिलकर रोज़ पांच दिन तक सेवन करने से आमाशय की सब तकलीफे दूर हो जाती है।

१०. नेत्र रोग- प्रतिदिन सोने से पहले पलको और आँखों के आस-पास कलौंजी का तेल लगाए और एक चम्मच तेल को एक कप गाजर के रास मे मिलकर एक माह तक पीए।

११.दस्त या पेचिस- एक चम्मच कलौंजी तेल को एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार ले, दस्त ठीक हो जायेगा।

१२. मानसिक तनाव- एक चाय की प्याली में ५ ग्राम कलौंजी का तेल डालकर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के लक्षण दूर हो जाते है।

१३. स्त्रियों के रोग- स्त्रियों के रोग जैसे श्रोतप्रदर, रक्त प्रदर, प्रसवोपरांत दुर्बलता व रक्तस्त्राव आदि के लिए कलौंजी गुणकारी है। थोड़ेसे पुदीने की पत्तीयों को दो ग्लास पानी में डालकर उबले, ३ ग्राम कलौंजी का तेल दाल कर दिन में दो बार पिए। बैगन, आचार, अंडा, और मछली से परहेज़ करे।

१४. बाल झड़ना- बालों में निम्बू का रास अच्छी तरह लगाए। १५ मिनट बाद बालो को शैम्पू से अच्छी तरह धोकर सूखा ले। फिर सूखे बालो में कलौंजी का तेल लगाए, एक सप्ताह उपचार के बाद बालो का झड़ना बंद हो जायेगा।

कलौंजी के बारे में कई प्राचीन ग्रंथो में पढ़ने क बाद मै इसी निष्कर्ष पर पंहुचा हु की कलौंजी एक महँ औषधि है जिसमे हर रोग से लड़ने की अापर, असीमित और अचूक क्षमता है।

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