तोंद कम करने के लिए उचित खान -पान

तोंद कम करने के लिए उचित खान -पान

पेट का बाहर निकल आना न सिर्फ भद्दा लगता है , बल्कि कई बीमारियों के खतरे बढ़ाने का काम करता है। स्वास्थ विशेषज्ञ के अनुसार , प्रतिदिन अपने भोजन में नमक की मात्रा घटाकर और पोटेश्यिम से भरपूर फाइबर युक्त भोजन खाकर तोंद बढ़ने के समस्या से बच सकता हैं।
पुरुषो की अपेक्षा महिलाओं में तोंद बढ़ने की समस्या से बच सकते हैं।
पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं मैं तोंद निकलने की शिकायत अधिक होती है। इसका मुख्य कारण है औरतों की आंत की लम्बाई का अधिक होना। महिलाओं एवं पुरुषों के पाचन तंत्र में कुछ मूल अंतर हैं। इसलिए पेट निकलने से बचने के लिए कुछ परहेज करने चाहिए।
नमक कम खाएं:-
भोजन मेँ नमक का अधिक प्रयोग करने से भी पेट फूल सकता है। एक दिन मेँ अधिकतम १५०० मिलीग्राम नमक खाना चाहिए।
वजन घटाएं प्रोटीनयुक्त नाश्ता से :-
प्रोटीनयुक्त नाश्ता करने से वजन घटाने के कार्यक्रम को बल मिलता है। प्रोटीनयुक्त चीजों के प्रयोग दिन मेँ भूख महसूस नहीं होती। कम प्रोटीन वाले नाश्ते की अपेक्षा उच्च प्रोटीन वाले नाश्ते से पेट भरा रहता है, लेकिन वसा और फाइबर की मात्रा उतनी ही रहती हैं।
सुबह के नाश्ते में अंकुरित अनाज , उबले चने , मूंगफली के दाने और बादाम का प्रयोग कर सकते हैं। मूंगफली के दानो की चिक्की भी नाश्ते में ली जा सकती हैं। इसके अलावा फल और सब्जियों और दालों का सेवन भी प्रोटीनयुक्त पदार्थो की आपूर्ति मेँ मदद करता है।
रेशेयुक्त भोजन ले :-
घुलनशील एवं अघुलनशील रेशेयुक्त भोजन की मिश्रित मात्रा का प्रयोग करना चुस्त-दुरुस्त एवं छरहरा रहने का सबसे अच्छा तरीका है। पेट के अत्यधिक भरे होने से बचें, क्योंकि इससे कब्ज होती है।
पोटेशियम से भरपूर भोजन ले:_
सोडियम चूँकि शरीर में जल के स्तर को बनाये रखता है, वहीँ पोटेशियम अतिरिक्त जल से निजात दिलाने में मददगार होता है। शकरकंद जैसे पोटेशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन करने से कमर के मध्य हिस्से को पतला करने में मदद मिलती है।
शरीर में पानी की मात्रा बरकरार रखें :-
पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से भोजन के रेशे अपना कार्य कहीं बेहतर तरिके से कर पाते है और कब्ज की शिकायत को दूर रखते हैं।
कृत्रिम मिठास वाले पदार्थों से बचें :-फ्लेवर्ड पेय पदार्थों , कम कार्बोहाइड्रेट वाले एवं चीनी रहित खाद्य पदार्थों हमारा शरीर आसानी से नहीं पचा पता। बड़ी आंत में पाये जाने वाले जीवाणु उन्हें फर्मेंट करने की कोशिश करते हैं , जिसके कारण पेट में गैस बनती है और पेट फूल जाता हैं।
पर्याप्त नींद कम करे मोटापा :-
पर्याप्त नींद न लेना भी मोटापे का कारण है। वैज्ञानिक अब इस दिशा में काम कर रहे हैं कि किस तरह से ‘ स्लिप डिप्राइवेशन ‘ कम कर ओबसिटी की दर घटाई जाए जो कि कई अन्य बीमारियों की जड़ है।
शोध के अनुसार बच्चों , किशोरों और युवाओं में कम नींद लेना उनमें मोटापे का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। मोटापे , ब्लडप्रेशर और डायबिटीज से लेकर कई अन्य बीमारियों की आगाज है। ऐसे मेँ देर रात तक जागना या फिर नींद मैं कटौती के साथ ही युवा और किशोर ज्यादा से ज्यादा वक्त इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के साथ बिताते है और बीच -बीच मई कैफीनयुक्त पेय लेते हैं ये सारे कारण मिलकर उन्हें मोटापे की और ले जाते हैं।
दूसरी तरफ जहाँ एक ओर लोग वजन कम करने के दौरान डाइट और व्यायाम पर फोकस करते हैं, वहीँ स्लिप पैटर्न अक्सर अनछुआ रह जाता है जबकि वजन कम करने या वजन न बढ़ने देने मैं इसकी अहम भूमिका है। नींद से वंचित लोगों में ग्रेलिन हॉर्मोन का प्रतिशत बढ़ जाता हैं,जबकि लेप्टिन का कम हो जाता है। साथ ही इंसुलिन -संवेदनशीलता बढ़ जाती है। इस तरह का हार्मोनल परिवर्तन लोगों में भूख बढ़ता है , जो कि वजन बढ़ने का एक और कारक है। अपनी नींद को व्यवस्थित करने से मोटापे की समस्या बहुत हद तक हल की जा सकती है।

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