सिकलसेल का बढ़ता खौफ

सिकलसेल का बढ़ता खौफ

छत्तीसगढ़ के लगभग ३५ लाख व्यक्ति सिकल सेल के वाहक है।
इसके आलावा पूरे मध्यभारत में भी इस बीमारी की भयावहता
बढ़ती जा रही है। विडंबना है कि मध्यपरदेश के कई जिलों के
ग्रामीण इलाको मेँ भी इसका प्रतिशत बहुत ज्यादा होने के बावजूद
ये अनचीन्हे हैं जबकि इस रोग की भयंकरता का अंदाजा इस बात
से लगाया जा सकता है कि इससे पीड़ित ६० प्रतिशत बच्चों की ६
माह के भीतर ही मृत्यु हो जाती हैं।
यह घातक जेनेटिक बीमारी ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है , जहाँ
लोग कम जागरूक हैं। यह रक्त -संबंधी विकार है जो आनुवांशिक
रूप से विकृत हीमोग्लोबिन के कारण होता है। यह असामान्य
हीमोग्लोबिन आपस में गुच्छा बना लेते हैं, जिसके कारण लाल रक्त
-कोशिकाएं विकृत होकर सिकल शेप हो जाती है। इनका जल्दी नष्ट
होना एनीमिया का कारक बनता है। इसके अलावा यह सिकल
सेल्स रक्त वाहिनियों में अवरोध पैदा कर खून का प्रवाह कम कर
देता हैं, इस वजह से अंग क्षतिग्रस्त भी हो सकता है।
सिकल सेल आनुवांशिक है लेकिन कोई बच्चा सिकल सेल एनीमिया
का मरीज तब होता है, जब वो पिता और माता दोनों से सिकल
सेल जींस पाता है। अगर एक सामान्य जीन और एक सिकल सेल

जीन मिलते हैं तो बच्चा बीमारी का वाहक हो सकता हैं, जो
बीमारी को अपने आने वाली पीढ़ी को दे।
ऐसे बढ़ती है सिकलिंग :-
ऑक्सीजन का स्तर कम होने, एसिडिटी बढ़ने और डिहाइड्रेशन के
कारण सिकलिंग को बढ़ावा मिलता है। इसके कुछ अंग भी निम्न
ऑक्सीजन स्तर और एसिडिटी के लिए प्रीडिस्पोज होते हैं , जैसे
तिल्ली , किडनी और लिवर। है मेटाबॉलिज्म रेट वालेअंग रक्त से
ज्यादा ऑक्सीजन लेकर सिकलिंग को बढ़ावा देते हैं जैसे दिमाग,
मांसपेशियां और सिकल सेल एनीमिया से ग्रस्त महिला का
प्लेसमेंट। इस तरह की स्थितियां इन अंगों को नुकसान पहुंचा
सकती है।
लक्षण :-
लगभग सालभर के बच्चों में सिकल सेल एनीमिया के लक्षण
दिखाई देने लगते हैं। बुखार , हाथ – पैरों में सूजन आना , पेट ,
छाती और जोड़ो में दर्द , नाक से खून आना और श्वास संबंधी
इंफेक्शन। इसके आलावा बच्चों में कुछ अन्य सामान्य लक्षण हैं
जोड़ों में तेज या मामूली दर्द , बेचैनी, सांस भरना एवं पीलिया।
किशोरों और युवाओं मेँ इन सभी लक्षणों के आलावा कई अन्य
लक्षण भी शामिल हैं जैसे डिलेड प्यूबर्टी , जोड़ों में अत्यधिक दर्द ,

एनीमिया का बढ़ जाना , मसूड़े से संबंधित रोग और विजन की
समस्या।
बचाव के लिए चुनिंदा उपाय :-
० नियमित रूप से जाँच कराना।
० आँखों पर विशेष ध्यान देना।
०पर्याप्त आराम लेना , ठण्ड से बचाव और अधिक मात्रा में पानी
पीना ताकि ऑक्सीजन की पूर्ति हो सके।
० भीड़भाड़ वाली जगहों पर यथासंभव कम से कम जाना जिससे
किसे तरह के इंफेक्शन की आशंका घटे।
० ऑक्सीजन की ज्यादा मांग वाले कसरत न करके चिकित्सकीय
परामर्श से हल्के -फुल्के व्यायाम करना।
० हवाई यात्रा से परहेज या फिर यह सुनिश्चित करना कि
एयरलाइन ऑक्सीजन बैग मुहैया कराए।
० एक्टिव और पैसिव दोनों तरह की स्मोकिंग टालना क्योंकि
इससे एक्यूट चेस्ट सिंड्रोम को बढ़ावा मिलता है।
सही खानपान इसके मरीजों के लिए अत्यावश्यक है। पानी ज्यादा
से ज्यादा पियें ताकि डिहाइड्रेशन न हो। विटामिन और मिनरल्स
का संतुलन चिकित्सकीय परामर्श से तय किया जाना चाहिए। कुछ

शोध ये भी कहते है कि ओमेगा थ्री फैटी एसिड वाले सपलीमेंट जैसे
सोयाबीन। आयल कोशिकाएं को जल्दी नष्ट होने से रोकते हैं।
इसके अलावा फॉलिक एसिड, विटामिन बी – १२ और बी – प्रदान
करने वाले सपलिमेंट भी मरीज को दिया जाना चाहिए।
जरूरत जागरूकता की :-
सिकल सेल , जेनेटिक बीमारी ग्रामीण इलाकों में गरीब और कम
पढ़े -लिखे लोगों को घेरती है,वे चिकित्सकीय लाभ नहीं ले पाते
और बीमारी पीढ़ी -दर -पीढ़ी बढ़ती जाती है। ऐसे में ग्रामीण
इलाकों मेँ जाकर काम की ज्यादा जरूरत है। इसके आलावा
सिकल सेल से प्रभावित दो व्यक्तियों की शादी पर ऐसा होने की
आशंका बहुत बढ़ जाती है। इस वजह से अलग -अलग गोत्र में
वैवाहिक संबंध को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि आशंका
कम हो सके।

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